शादौरा49 मिनट पहले
बसकर संवाददाता शादौला
पश्चिमी शिक्षा भारतीय संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास कर रही है। पश्चिम में सूर्य के अस्त होते ही पश्चिमी शिक्षा हमारी संस्कृति को डुबो रही है। यह बात आचार्यश्री विद्या सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री शाश्वत सागर महाराज ने शुक्रवार को पार्श्वनाथ मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि आज के पश्चिमी लोग अपने बच्चों से ज्यादा अपने पालतू कुत्तों से प्यार करते हैं। हम इस संस्कृति का आँख मूँद कर अनुसरण और स्वीकार करते हैं। हमारे तीर्थंकरों ने वसुधैव कुटुंबकम की शिक्षाओं को त्याग दिया और अपने लिए जीवन जीना शुरू कर दिया। आज के समाज में हम अपने बेटों और बेटियों को केवल काम के लिए शिक्षित करते हैं, उनकी स्वतंत्रता के लिए नहीं, बल्कि उन्हें नौकर या गुलाम बनाने के लिए।
मुनिश्री ने कहा कि हम अपनी मातृभाषा को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हम अपनी भाषा के बजाय विदेशी भाषाओं को महत्व देते हैं, जो हमें अपनी संस्कृति से दूर करती है। आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज ने इस दिशा में सराहनीय प्रयास किये। विभिन्न स्थानों पर बेटियों को अपनी मातृभाषा में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा के साथ-साथ प्रतिभास्थलियों के माध्यम से लौकिक शिक्षा भी मिलती है। उनका विचार था कि यदि पुत्र संस्कारित होगा तो वह कुल का नाम रोशन करेगा। बेटी संस्कारित होगी तो दो कुलों का नाम रोशन करेगी। गौरतलब है कि मुनिश्री पिछले दिनों अशोकनगर से शाढ़ौरा के लिए प्रस्थान कर गए थे। शनिवार को गुना की ओर कौन यात्रा करेगा? मुनिश्री कथित तौर पर राजस्थान की यात्रा की योजना बना रहे हैं।