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रांची में एनयूएसआरएल पंचायती राज एवं महिला सशक्तिकरण केंद्र द्वारा ‘महिलाओं के खिलाफ अन्याय के परिणाम: झारखंड में जादू-टोना’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता पद्मश्री छुटनी महतो…
न्यूज़रैप हिंदुस्तान, रांची बुध, 23 अक्टूबर 2024 07:31 अपराह्न शेयर करना
लंच संवाददाता। परिचर्चा का आयोजन बुधवार को रांची के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल स्टडीज (एनयूएसआरएल) में पंचायती राज और महिला सशक्तिकरण केंद्र द्वारा किया गया था। विषय था ‘महिलाओं के खिलाफ अन्याय के दुष्परिणाम: ग्रामीण झारखंड में डायन की कुप्रथा’। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता पद्मश्री छुटनी महतो थीं. अन्य प्रतिभागियों में आकृति लाकड़ा (स्वतंत्र शोधकर्ता), जेनी टोप्पो (जेवियर विश्वविद्यालय), और शिवानी प्रिया (सामाजिक कार्यकर्ता) शामिल थीं। इसकी अध्यक्षता डॉ. संगीता राहा ने की। पद्मश्री छुटनी महतो ने साझा की अपने संघर्ष की कहानी. उसने बताया कि कैसे उसे अपने बच्चों के साथ भागना पड़ा क्योंकि गाँव वालों ने उसे डायन घोषित कर दिया और उसे मारने की योजना बनाई। समाज द्वारा डायन करार दी गई सईद को आज पद्मश्री पुरस्कार मिला। आकृति लाकड़ा ने कहा कि सशक्त महिलाओं को समाज स्वीकार नहीं करता है. जेनी टोप्पो ने कहा कि झारखंड में जादू-टोना की प्रथा जारी है और कई मामले अपंजीकृत रहते हैं. शिवानी प्रिया ने कहा कि जब डायन के नाम पर हत्याएं होती हैं तो न सिर्फ महिलाएं बल्कि बच्चे भी प्रभावित होते हैं.
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने एक नाटक प्रस्तुत किया जो गांव में महिलाओं को डायन बताकर हत्या किये जाने की हकीकत पर केन्द्रित था। कार्यक्रम में डॉ. जिसु केतन पटनायक, पंजीकरण सहायक, शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।