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नईदुनिया अभियान: खेल जगत ने आगे आकर कहा है कि अगर युवाओं को नशे से दूर करना है तो उन्हें खेलों से जोड़ना होगा।


नईदुनिया अभियान: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर अब नशे की बुराइयों के खिलाफ मुखर होने लगा है। नईदुनिया द्वारा फैलाई जा रही जनजागरूकता में शहर का खेल समुदाय भी शामिल हो गया। खेल जगत से जुड़े लोगों ने एक सुर में कहा, “यह इंदौर के लिए अस्वीकार्य है।” उन्होंने खेल के माध्यम से नशे की लत से छुटकारा पाने का विकल्प भी सुझाया। सभी का मानना ​​है कि युवाओं को सही दिशा देने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा।

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खेलों में भाग लेने से लोग अधिक अनुशासित बनते हैं

मध्य प्रदेश ओलंपिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ओम सोनी ने कहा कि खेल जीवन और ड्रग्स के बीच कोई संबंध नहीं है। खेलों में भाग लेने से लोग अनुशासित रहते हैं। गेम की लत ही ऐसी होती है कि इंसान दूसरी लतों के बारे में भूल जाता है। यदि हमें युवाओं को नशे से मुक्ति दिलानी है तो हमें खेलों में उनकी भागीदारी बढ़ानी होगी। हमें उन्हें विकल्प, बेहतर मैदान और सुविधाएं देनी होंगी। अगर युवा खेल की दुनिया में आएंगे तो निश्चित रूप से नशे की लत से दूर रहेंगे।

एक युवक जो नशे के कारण अपनी दिशा खो बैठा

विश्वामित्र पुरस्कार विजेता कोच वीरेंद्र पंवार ने कहा कि नशाखोरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। युवा इस देश का भविष्य हैं, लेकिन नशे की लत के कारण वे दिशा खो रहे हैं। खेलों में नशे के लिए कोई जगह नहीं है।’ खेल हमें जीवन में अनुशासन सिखाते हैं, लेकिन आधुनिक समय में युवा खेलों से दूर होते जा रहे हैं और मोबाइल फोन का इस्तेमाल प्रतिबंधित होता जा रहा है। मोबाइल का उपयोग सकारात्मक रूप से किया जा सकता है, लेकिन मोबाइल के माध्यम से युवाओं के दिमाग में कई भ्रष्ट बातें घर कर रही हैं।

सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी

बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख संजय जगदाले ने कहा कि शहर में युवाओं के नशीली दवाओं के सेवन के बाद हुई कई घटनाएं चिंताजनक हैं। यह एक ऐसा विषय है जिस पर चर्चा होनी चाहिए और जागरूकता बढ़ानी चाहिए। अगर सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि बुजुर्ग लोग भी नशा करते हैं और दूसरों को परेशानी पहुंचाते हैं तो यह गलत है। सभी को अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। इसे शिक्षा और जागरूकता से ही हल किया जा सकता है।

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नशा न केवल व्यक्ति के लिए बल्कि परिवार के लिए भी हानिकारक है।

भारत की जूनियर डेविस कप टीम के कोच साजिद लोधी का कहना है कि आपको अच्छी चीजों के प्रति जुनूनी होना चाहिए। अपने शौक का आनंद लें, लेकिन उन चीज़ों के बारे में न सोचें जो आपके दिमाग और शरीर के लिए हानिकारक हैं। इस तरह की लत का असर सिर्फ एक व्यक्ति पर ही नहीं बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। खेलों में भाग लेना आपको नशे की लत से दूर रख सकता है क्योंकि यह आपको अनुशासित बनाता है।

पोस्टकर्ता: हेमराज यादव



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